-
548
छात्र -
538
छात्राएं -
40
कर्मचारीशैक्षिक: 35
गैर-शैक्षिक: 5
परिकल्पना
- के. वि. सं. उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षिक प्रयासों के माध्यम से उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए अपने छात्रों को ज्ञान/मूल्य प्रदान करने और उनकी प्रतिभा, उत्साह और रचनात्मकता का पोषण करने में विश्वास रखता है।
उद्देश्य
- शिक्षा का एक सामान्य कार्यक्रम प्रदान करके रक्षा और अर्ध-सैन्य कर्मियों सहित स्थानांतरणीय केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना है।
- स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने और गति निर्धारित करने के लिए।
- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) आदि जैसे अन्य निकायों के सहयोग से शिक्षा में प्रयोग और नवाचारों को शुरू करना और बढ़ावा देना।
- राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास करना और बच्चों में “भारतीयता” की भावना पैदा करना।

विद्यालय के बारे में
उत्पत्ति
वर्ष 1995 में उड़ीसा राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित एक एकल खंड सिविल सेक्टर स्कूल के रूप में शुरू हुआ।
एनएसी गेस्ट हाउस बिल्डिंग के एक अस्थायी आवास में केवल I से V तक प्राथमिक कक्षाओं के साथ शुरू हुआ। अब 2004 से विद्यालय गांधी मार्ग अंगुल में स्थायी परिसर में कार्य कर रहा है।..
विद्यालय के दृष्टिकोण के बारे में
रक्षा और अर्धसैन्य कर्मियों सहित स्थानांतरणीय केन्द्रीय सरकारी कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को शिक्षा का एक सामान्य कार्यक्रम प्रदान करके पूरा करना; स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता को आगे बढ़ाना और गति निर्धारित करना; शिक्षा में प्रयोग और नवीनता को आरंभ करना और बढ़ावा देना।...
विद्यालय के उद्देश्य के बारे में
रक्षा और अर्धसैन्य कर्मियों सहित स्थानांतरणीय केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को शिक्षा का एक सामान्य कार्यक्रम प्रदान करके पूरा करना; स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता का अनुसरण करना और गति निर्धारित करना शिक्षा में प्रयोग और नवीनता को आरंभ करना और बढ़ावा देना...
संदेश
श्री विकास गुप्ता, भा. प्र. से., आयुक्त
शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर मैं देश के समस्त शिक्षक समुदाय को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ।
आज जब शिक्षा का क्षेत्र तीव्र गति से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, तब भी शिक्षण की मूल भावना और उसका सार शाश्वत है। देशभर के केन्द्रीय विद्यालयों में हमारे शिक्षक पूर्ण समर्पण, प्रतिबद्धता और अटूट उत्साह के साथ शिक्षा के उद्देश्य को आगे बढ़ा रहे हैं।
श्री सरदार सिंह चौहान
उपायुक्त
तत्कर्म यन्न बंधेय सा विद्या या विमुक्तये। आयासायापरम कर्म विद्यान्या शिल्पनैपुणम ।। – श्री विष्णुपुराण सच्चा कर्म वह है जो आत्मा को नहीं बांधता, और सच्ची विद्या वह है जो मुक्ति का रास्ता दिखाती है। बाकी सभी काम बस मेहनत हैं, और बाकी सभी विद्याएँ सिर्फ़ हुनर का दिखावा हैं। भारत के ऋषियों और महात्माओं ने बहुत पहले ही ज्ञान को इंसान की मुक्ति का आखिरी ज़रिया बताया है। बहुत पुराने समय से, इंसानियत आज़ाद होने की चाहत रखती है—डर और भूख से, अंदर की गंदगी और नुकसान पहुँचाने वाली आदतों से, नैतिक गिरावट, कमज़ोरी, लाचारी, हीनता, और बीमारी और दुख के बोझ से। विष्णु पुराण का गहरा ज्ञान हमें याद दिलाता है कि ज्ञान के ज़रिए ही इंसान को सभी दुखों से ऊपर उठने की कोशिश करनी चाहिए। सच्ची सीख त्याग से पैदा होती है और अनुशासन और तपस्या से बढ़ती है; यह सच्ची कोशिश और लगन के बिना कभी नहीं मिलती। इसलिए, आइए हम अनुशासन के रास्ते पर बिना रुके, लगन से चलें। आइए हम विनम्रता के साथ ज्ञान हासिल करें, और अपने पास मौजूद सभी चीज़ों का सोच-समझकर और सही तरीके से इस्तेमाल करें। अपने खाने, व्यवहार और विचारों में तालमेल बिठाकर, हम प्रकृति से मिली अनंत क्षमता को जगा सकते हैं और उसका पोषण कर सकते हैं—उसे ज्ञान की तेज़ रोशनी में फलने-फूलने दे सकते हैं। हम सभी कृष्ण यजुर्वेद के तैत्रीय उपनिषद के इस सूत्र का प्रतिदिन अपने सिद्धांतों में प्रातःकालिक प्रार्थना सभा में सस्वरपाठ करते हैं :- ॐ सह नाववतु सह नौ भुनक्तु , सह वीर्यम करवावहै | तेजस्वि नावधीतमत्सु मा विद्विषावहै, ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।। आइए हम सब मिलकर इस गाइडिंग प्रिंसिपल में छिपे गहरे संदेश को समझें और इसे अपने रोज़ाना के कामों में शामिल करने की कोशिश करें। इसके सार को अपने अंदर उतारकर, हम अपने कामों को मकसद और जागरूकता के साथ करें। मैं भुवनेश्वर डिवीज़न के सभी अधिकारियों, प्रिंसिपलों, टीचरों, स्टूडेंट्स और स्टाफ़ का दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ। आप सभी को सफलता, संतुष्टि और एक उज्ज्वल, खुशहाल भविष्य मिले।
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श्री हिरण्मय प्रसाद चंद
प्राचार्य
“ऐसे जियो जैसे कि तुम कल मरने वाले हो। ऐसे सीखो जैसे कि तुम हमेशा जीने वाले हो” - महात्मा गांधी
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पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-1 अनुगुल में ‘हिंदी माह’ का भव्य शुभारंभ “हिंदी हमारी पहचान है, हिंदी हमारा गौरव है।” 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक चलने वाले ‘हिंदी माह’ का विधिवत एवं गरिमामय शुभारंभ हुआ। प्राचार्य श्री चाँद ने महत्व बताया व संदीप नेहरा ने रूपरेखा दी।
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29/08/2026
#PMSHRI KV No.1 अनुगोला में राष्ट्रीय खेल दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान फिटनेस, टीम वर्क और पारंपरिक खेलों की समृद्ध विरासत को बढ़ावा दिया गया। छात्रों ने खेलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और भारत की खेल संस्कृति तथा #Khelega Bharat, #Badhega Bharat की भावना का जश्न मनाया।
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15/08/2026
#PMSHRI KV नंबर 1 अंगुल में स्वतंत्रता दिवस 2026 देशभक्ति के जोश और गर्व के साथ मनाया गया। तिरंगे, प्रेरणादायक प्रस्तुतियों और हमारे छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आज़ादी, एकता और देश के प्रति प्रेम की भावना को जीवंत कर दिया।
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वैज्ञानिक प्रतिभा और इनोवेशन का प्रदर्शन किया
02/09/2026
अर्पिता बेहरा ने राष्ट्रीय स्तर की #RashtriyaBalVaigyanikPradarshani में स्कूल का गर्व से प्रतिनिधित्व किया और राष्ट्रीय मंच पर अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा और इनोवेशन का प्रदर्शन किया।
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